Chapter–3 इनपुट डिवाइस और आउटपुट डिवाइस ( Input Device & Output Device )
इनपुट तथा आउटपुट डिवाइस
(Input and Output Device)
इनपुट डिवाइसेस
Input Device:
एक कम्प्यूटर में इनपुट तथा आउटपुट दोनों उपकरण होते हैं। जिन यंत्रों के द्वारा डेटा इनपुट किया जाता है अर्थात् जिन यंत्रों से आंकड़ें, शब्द या निर्देश मेमोरी में डाले जाते हैं, इनपुट डिवाइसेस कहलाते हैं। दूसरे शब्दों में ये ऐसे यंत्र हैं जिनके द्वारा हम कम्प्यूटर को निर्देश देते
है और कम्प्यूटर उन पर प्रोग्राम के अनुरूप कार्य करता है। जैसे कि की-बोर्ड, माउस आदि ।
कुछ प्रमुख इनपुट डिवाइसेस निम्नलिखित हैं:
1. की-बोर्ड (Key-Board)
2 माउस (Mouse)
3. ट्रैकबॉल (Trackball)
4. जॉयस्टिक (Joystick)
5. स्कैनर (Scanner)
6. माइक्रोफोन (Microphone)
7. वेब कैम (Web Cam)
8. बार कोड रीडर (Bar Code Reader)
9. ओ सी आर (OCR-Optical Character Reader)
10. एम आई सी आर (MICR-Magnetic Ink Character Reader)
11. ओ एम आर (OMR-Optical Mark Reader)
12. किमोल टैग रीडर (Kimball Tag Reader)
13. स्पीच रेकग्निशन सिस्टम (Speech Recognition System)
14. लाइट पेन (Light Pen)
15. टच स्क्रीन (Touch Screen)
1. की-बोर्ड (Key Board):
की-बोर्ड किसी भी कम्प्यूटर की प्रमुख इनपुट डिवाइस हैं। जिनके प्रयोग से कम्प्यूटर में टेक्स्ट तथा न्यूमैरिकल डेटा निवेश (entry) कर सकते हैं। की-बोर्ड में सारे अक्षर टाइपराइटर की तरह क्रम में होते है। लेकिन इसमें टाइपराइटर से ज्यादा बटन होते हैं। इसमें कुछ फंक्शन बटन होते हैं जिनको बार-बार किये जाने वाले कार्यों के लिए पूर्व निर्धारित किया जा सकता है। जैसे-F1 बटन को सहायता (Help) के लिए प्रोग्राम किया जाता है। की-बोर्ड को कम्प्यूटर से जोड़ने के लिए एक विशेष जगह (Port) बनी होती है, लेकिन आजकल USB की-बोर्ड आते हैं जो कम्प्यूटर के USB पोर्ट में लग जाते है तथा वायरलेस की-बोर्ड भी आते हैं जिन्हें सिस्टम से जोड़ने की जरूरत नहीं होती है। की-बोर्ड में पाँच प्रकार
के को (Key) होते हैं।
(a) अलफाबेट को (Alphabet Keys):
की-बोर्ड में 26 अल्फाबेट की (Keys) A से Z तक
होते हैं, जिनका उपयोग कर हम किसी भी शब्द या टैक्स्ट (Text) को लिख (Type) सकते हैं।
(b) संख्यात्मक की (Numeric Keys):
इन की (Keys) का उपयोग नम्बर या अंक टाइप
करने के लिए होता है। इन पर 0 से 9 तक की संख्या अंकित रहते हैं। साधारणतः की-बोर्ड के दाहिने तरफ अंक टाइप करने के लिए संख्यात्मक की-पैड होता है। इसमें से 9 तक अंक, दशमलव जोड़, घटाव, गुणा तथा भाग के की (Key) होते है।
(c) फंक्शन की (Function Keys):
ये की-बोर्ड में सबसे ऊपर स्थित होते हैं। इन बटना
पर F1 से F12 अंकित होते हैं। इनका उपयोग (use) बार-बार किये जाने वाले कार्य के लिए पहले से निर्धारित रहता है। इनके उपयोग से समय की बचत होती है।
(d) कर्सर कंट्रोल की (Cursor Control Keys) : इन की (Keys) का उपयोग स्क्रीन पर कर्सर को कहीं भी ले जाने के लिए होता है। ये चार भिन्न दिशाओं को इंगित करते है जिसे चार तीर के निशान से दर्शाया रहता है। इसे एरो की ( Arrow Key) भी कहा जाता है। इसे
दायाँ (Left), बायां (Right), ऊपर (Up) या नीचे (Down) ऐरो की कहते हैं।
इनके ठीक ऊपर कर्सर को नियंत्रित करने के लिए चार और बटन होते हैं, जिन्हें होम,
एन्ड, पेज अप और पेज डाउन कहते हैं।
होम (Home) : कर्सर को लाइन के शुरू में ले जाता है।
एन्ड (End) :कर्सर को लाइन के अंत में ले जाता है।
पेज अप (Page Up): कर्सर को एक पेज पीछे या पिछले पेज में ले जाता है।
पेज डाउन (Page Down) : कर्सर को अगले पेज पर ले जाता है।
(e) स्पेशल परपज की (Special Purpose Key)
कैप्स लॉक की (Caps Lock Key) :
यह एक टॉगल बटन है। टॉगल बटन अर्थात् एक
बार दबाने पर वह सक्रिय तथा दूसरी बार पुनः उसे दवाने पर निष्क्रिय हो जाता है। इसे सक्रिय रखने (On) पर सारे अक्षर बड़े अक्षरों (Capital letter) में लिखा जाता है। जिसे कम्प्यूटर में Upper case कहते है। इसे पुनः दबा कर निष्क्रिय किया जाता है, जिससे छोटे अक्षरों ( Small letter या Lower case) में लिखना आरम्भ हो जाता है।
नम लॉक की (Nurn Lock Key) :
यह भी टॉगल बटन है। इसके सक्रिय रहने से की-बोर्ड के ऊपर की संख्यात्मक की-पैड सक्रिय (On) रहता है, नहीं तो नंबर पैड डायरेक्शनल एरो के रूप में कार्य करता है।
स्क्रॉल लॉक की (Scroll LockKey) :
यह बटन की-बोर्ड के ऊपर पॉज की के पास स्थित
होता है। यह टेक्स्ट (Text) या रन कर रहे प्रोग्राम को अस्थायी रूप से एक स्थान पर रोकता है।
फिर से टेक्स्ट या प्रोग्राम को सक्रिय करने के लिए इसी बटन को दुबारा उपयोग करना होता है।
पॉज की (Pause Key):
यह "की" की बोर्ड के ऊपर दाहिने तरफ स्थित होता है। यह बटन कोई अस्थायी तौर पर चल रहे प्रोग्राम को रोक देता है तथा किसी बटन को दबाने का फिर से प्रोग्राम चलने लगता है। जैसे- कम्प्यूटर गेम में अस्थायी रूप से गेम को रोकने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
मोडिफायर की (Modifier Key):
यह कम्प्यूटर की बोर्ड पर विशेष की है जो किसी
'की' के कांबिनेशन में उपयोग किया जाता है। यह दूसरे 'की' के कार्य को रूपान्तरित कर देता है। जैसे-Alt + F4 MS-विन्डोज में सक्रिय प्रोग्राम विडों को बंद कर देता है, जहाँ Alt मोडिफायर की है जो F4 के कार्य को रूपान्तरित कर देता है।
कुछ मोडिफायर की (Key) निम्नलिखित हैं-
1. शिफ्ट की 2. कंट्रोल की 3. ऑल्ट की
2. माउस (Mouse):
माउस एक इनपुट डिवाइस है। डगलस सी इंजेल्वरर्ट ने 1977 में इसका आविष्कार किया था। इसमें लेफ्ट बटन, राइट बटन और बीच में एक स्क्रोल व्हील होता है। माउस के उपयोग करने से हमें की-बोर्ड के किसी बटन को याद रखने की आवश्यकता नहीं होती है, बस माउस के प्वाइंटर (Pointer) को स्क्रीन पर किसी नियत स्थान पर क्लिक करना होता है। इसे प्वाइनटिंग डिवाइस भी कहते हैं। माउस दो बटन, तीन बटन तथा ऑप्टिकल भी होते हैं। माउस के नीचे एक रबर बॉल होता है, जो
माउस को सतह पर हिलाने में मदद करता है । बॉल के घुमाने से स्क्रीन पर माउस प्वाइंटर के दिशा में परिवर्तन होता है। माउस के नीचे रखे स्लेट के आकार की वस्तु को माउस पैड कहते हैं।
माउस के मुख्यत चार कार्य हैं-
क्लिक या लेफ्ट क्लिक (Click or left click):
लेफ्ट माउस बटन को एक बार दबाकर छोड़ने पर यह एक आवाज (Clicking Sound) देता है तथा स्क्रीन पर किसी एक object का चयन (Select) करता है। जैसे माई कम्प्यूटर (My Computer lcon) पर लेफ्ट बटन क्लिक करने से इसका रंग नीला हो जाता है मतलब इसका चयन (Selected) हो गया है। इस बटन का उपयोग सामान्यतया OK के लिए किया जाता है।
डबल क्लिक (Double click) : लेफ्ट माउस बटन को जल्दी जल्दी दो बार दबा का छोड़ने को डबल क्लिक कहते हैं। इसका उपयोग किसी फाइल, डाक्यूमेंट या प्रोग्राम को खोलने (Open) के लिए होता है।
राइट क्लिक (Right click) : राइट माउस बटन को एक बार दबा कर छोड़ने पर यह स्क्रीन पर आदेशों (Commands) की एक सूची (list) देता है। यह ऑब्जेक्ट की प्रोपर्टीज के एक्सेस करने में उपयुक्त होता है।
ड्रैग और ड्रॉप (Drag and Drop) :
इसका उपयोग किसी चीज (Item) को स्क्रीन पर
एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए होता है। स्क्रीन के किसी एक Item के ऊपर प्वाइंटा
को ले जाकर लेफ्ट माउस बटन को दबाये हुए स्क्रीन पर किसी दूसरी जगह ले जाकर छोड़ देते है। जिसके फलस्वरूप वह Item दूसरी जगह स्थानांतरित हो जाता है। इस क्रिया को ड्रग और ड्रॉप कहते हैं।
3. ट्रैकबॉल (Trackball):
यह माउस का ही एक विकल्प है। इसके ऊपर एक बाल होता है जिसे हाथ से घुमाकर प्वाइंटर की दिशा में परिवर्तन किया जाता है। मुख्यतः इसका उपयोग
चिकित्सा के दोष में, कैड (CAD) तथा कैम (CAM) में किया जाता है।
4.जॉयस्टिक (Joystick):
यह एक इनपुट डिवाइस है जिसका उपयोग विडियो तथा कम्प्यूटर गेम खेलने में होता है। इसकी भी कार्य प्रणाली ट्रैक बॉल की तरह होती है, केवल बॉल की जगह
इसमें एक छड़ी (Stick) लगी होती है।
5. स्कैनर (Scarrner):
इसका उपयोग टेक्स्ट (Text) या चित्र (Image) को डिजिटल रूप में परिवर्तित करने में होता है जिसे हम लोग स्क्रीन पर देख सकते हैं। इन स्कैन चित्रों का उपयोग मिन्न-भिन्न क्षेत्रों में किया जा सकता है। इन स्कैन चित्रों को मेमोरी या सीडी में सुरक्षित रखा या कोई प्रोसेस या एडिटींग किया जा सकता है। यह भी इनपुट डिवाइस है। यह फोटो कॉपियर मशीन की तरह दिखता है। काउन्टर पर बैठे सेल्स क्लर्क किसी वस्तु का
टैग स्कैन कर ऑटोमेसन का प्रयोग करता है।
6. माइक्रोफोन (Microphone) :
इस इनपुट डिवाइस का प्रयोग किसी भी आवाज को
रिकार्ड करने में होता है।
7. वेबकैम (Webcam) :
इसका प्रयोग इंटरनेट पर फोटो देखने तथा
फोटो लेने के लिए होता है। इसका उपयोग कर इंटरनेट की सहायता से दूर बैठे आदमी का फोटो देख सकते हैं, परन्तु दूसरे व्यक्ति के पास भी webcam उपलब्ध होना चाहिए। यह डिजिटल कैमरे की तरह होता है जिसे कम्प्यूटर से जोड़कर इनपुट डिवाइस के रूप में उपयोग होता है।
बार कोड रीडर (Bar Code Reader):
यह Point of sales डेटा रिकार्डिंग है। आजकल सुपर मार्केट में मूल्यों तथा डेटा अपडेट करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। सुपर मार्केट में सामान पर जो सफेद और काली साइन बनी होती है. वह बार कोड है। जिसे बार कोड रीडर जो एक स्कैनिंग डिवाइस है के द्वारा स्कैन कर डिजिटल रूप में कम्यूटर में भेजा जाता है। आजकल बार कोड रीडर का उपयोग सुपर मार्केट, पुस्तकालय, बैंक तथा पोस्ट ऑफिस में भी किया जाता है।
9. ओ सी जार (OCR-Optical Characters
Recognition) :
यह टाइप या हाथ से लिखे हुए डेटा को भी पढ़ सकता है। यह स्कैनर तथा विशेष सॉफ्टवेयर का
संयोजन है जो प्रिन्टेड डेटा या हस्तलिखित डेटा को ASCII में रूपान्तरित कर देता है। इसका उपयोग कागजी रिकार्ड को electric filing तथा स्कैन चालान को स्प्रेडशीट में परिवर्तित करने में होता है।
10. एम आई सी आर (MICR-Magnetic Ink
Character Reader) :
खास चुम्बकीय स्याही से लिखें अक्षरों या डाक्यूमेंट को इसके द्वारा पढ़ा जाता है. या कम्यूटर में संग्रह किया जाता है। बैंकों में इस तकनीक का व्यापक उपयोग होता है। चुम्बकीय स्याही और विशेष फॉन्ट का संयोजन से प्रति घंटे हजारों चैक स्कैन किया जा सकता है।
जिससे समय की बचत तथा तीव्र गति से कार्य सम्पादित
किया जा सकता है।
11.ओ एम आर (OMR-Optical Mark
Reader) :
यह एक इनपुट डिवाइस है जिसका
प्रयोग फार्म या कार्ड पर विशिष्ट स्थानों पर डालें
गये चित्रों को पढ़ने में होता है। इसमें उच्च जीवता वाले प्रकाशीय किरणों को डालकर चिन्हों को पढ़ा जाता है। इसका उपयोग लॉटरी टिकट, ऑफिसियल फार्म तथा वस्तुनिष्ठ उत्तर पुस्तिकाओं को जाँचने में होता है।
12. किंबॉल टैग रीडर (Kimball Tag Reader): किंबॉल टैग एक छोटा-सा कार्ड।
जिसमें छेद पंच रहते है। जैसे कि दुकान में कपड़े में कार्ड लगा रहता है। जिसे खरीदने के बाद निकाल दिया जाता है और कम्यूटर केन्द्र में प्रोसेसिंग के लिए भेज दिया जाता है।
13. स्पीच रिकग्निशन सिस्टम (Speech Recognition System):
स्पीच रिकग्निशन सिस्टम माइक्रोफोन या टेलीफोन द्वारा बोले गये शब्दों के सेट को पकड़कर ध्वनि में परिवर्तित करने की क्रिया है। रेकगनाइज्ड शब्दों को कमांह और नियंत्रण, डाटा प्रविष्टि और दस्तावेज तैयार करने के लिए उपयोग किया जा सकता है। स्पीच रेकग्निशन सिस्टम, बोले हुए शब्दों को मशीन के पढ़ने लायक इनपुट में बदल देता है। इसका उपयोग Voice डायलॉग, सरल डाटा प्रविष्टि, स्पीच से टेक्स्ट प्रोसेसिंग तथा हवाई जहाज कॉकपिट में होता है।
14. प्रकाशीय कलम (Light Pen):
यह एक इनपुट डिवाइस है। इसका उपयोग (direct)
स्क्रीन पर कुछ भी लिखने, चित्र बनाने में होता है।
15. टच स्क्रीन (Touchscreen):
यह एक इनपुट डिवाइस है। जब हम इस स्क्रीन को स्पर्श करते हैं तो यह पता लगा लेता है कि हमने इसे कहाँ स्पर्श किया है।
इसका उपयोग बैंकों में एटीएम तथा सार्वजनिक सूचना
केन्द्रों में स्क्रीन पर उपलब्ध विकल्पों का चयन करने के
लिए किया जाता है। इसका उपयोग संगीत सुनने के
लिए होता है।
आउटपुट डिवाइस
Output Devices
ये ऐसे उपकरण है जो प्रोसेस के उपरान्त रिजल्ट देते या प्रदर्शित करते हैं। इसके द्वारा कम्प्यूटर द्वारा प्रोसेस जानकारी को देखते या ग्रहण करते हैं।
कुछ आउटपुट डिवाइस निम्नलिखित है-
1. मॉनिटर (Monitor)
2. प्रिन्टर (Printer)
3. स्पीकर (Speaker)
4. फ्लॉटर (Plotter)
5. स्क्रीन इमेज प्रोजेक्टर (Screen Image Projector)
1. मॉनिटर (Monitor) :
यह एक आउटपुट डिवाइस है जो चित्र या प्रोसेस इनपुट के रिजल्ट को स्क्रीन पर प्रदर्शित करता । यह कम्प्यूटर तथा यूजर के बीच संबंध स्थापित करता है। मानिटर की गुणवत्ता की पहचान डॉट पिच, रिजाल्यूशन और रिफ्रेश रेट से किया जाता है।
कम्प्यूटर की समस्त सूचनाएं देखने के लिए इस डिवाइस का प्रयोग किया जाता है। इसे VDU (Visual Display Unit) भी कहते हैं। इसके डिस्प्ले आकार को डायगोनली मापा जाता है।
मॉनीटर का रिजोल्यूसन जितना अधिक हो पिक्सल उतने ही अधिक होंगे।
मुख्यतः दो प्रकार के मॉनिटर आजकल प्रचलन में है-
(a) सी आर टी मॉनिटर (CRT-Cathod Ray Tube) :
यह मॉनिटर उसी सिद्धान्त पर कार्य करता है, जिन पर टीवी करता है। इसमें एक कैथोड रे ट्यूब रहता है जिसमें इलेक्ट्रॉन गन लगा होता है। जिसके द्वारा प्राप्त इलेक्ट्रॉन बीम को परावर्तित कर चित्र बनाया जाता है अर्थात् स्क्रीन पर डिस्प्ले प्राप्त होता है। सी आर टी स्क्रीन थोड़ी मुड़ी होती है। मॉनीटर पर चित्र छोटे छोटे बिन्दुओं
से मिलकर बनता है जिने पिक्सेल कहते हैं।
(b) टी एफ टी मानिटर (TFT):
यह एक सीधा (Flat) स्क्रीन होता है जो हल्का तथा पतला होता है तथा कम जगह घेरता है। यह सी.आर.टी मॉनिटर से अपेक्षाकृत महंगा होता है।
2. प्रिन्टर (Printer):
प्रिन्टर एक मुख्य आउटपुट डिवाइस है जिसके द्वारा प्रिंटेड कॉपी या हार्ड कॉपी कागज पर प्राप्त होता है। इसका उपयोग स्थायी दस्तावेज (Permanent Document) तैयार करने के लिए होता है।
प्रिन्टर के प्रकार-
कम्प्यूटर प्रिन्टर की मुख्यतः तीन समूहों में बाँटा जाता है-
(a) कैरेक्टर प्रिन्टर (Character Printer):
यह एक बार में एक कैरेक्टर प्रिन्ट करता है।
इसे सीरियल प्रिन्टर भी कहते है। कैरेक्टर प्रिन्टर 200-450 कैरेक्टर/सेकेन्ड प्रिन्ट करता है।
(b) लाइन प्रिन्टर (Line Printer):
यह एक बार में एक लाइन प्रिन्ट करता है। वह तीव्र
गति से कार्य करता है। लाइन प्रिन्टर 200-2000 कैरेक्टर/मिनट प्रिंट करता है।
(c) पेज प्रिन्टर (Page Printer):
यह एक बार में पूरा पेज प्रिन्ट करता है। यह विशाल
डेटा का प्रिन्ट लेने में सक्षम होता है।
प्रिन्ट करने के तरीके (Manner) के अनुसार प्रिन्टर दो प्रकार के होते हैं-
(a) इम्पैक्ट प्रिन्टर (Impact Printer) : यह कागज, रिबन तथा करैक्टर तीनों एक-साथ चोट कर डेटा प्रिन्ट करता है। इम्पैक्ट प्रिन्टर भी कई प्रकार के होते हैं।
(i) डॉट मैट्रिक्स प्रिन्टर (Dot Matrix Printer):
यह एक कैरेक्टर प्रिन्टर है। जिसमें एक
प्रिन्ट हेड होता है जो आगे-पीछे तथा ऊपर-नीचे घूमता
है। यह स्याही लगे रिवन पर चोट कर प्रिन्ट करता है।
यह 80 कॉलम तथा 132 कॉलम दो तरह की क्षमताओं
में आता है। इसमें प्रिन्टिंग खर्च बाकी प्रिन्टरों की अपेक्षा
कम आता है लेकिन प्रिन्ट की गुणवत्ता और स्पीड दूसरे
प्रिन्टर के मुकाबले कम होती है। इसमें एक बार में
केवल एक रंग का प्रिन्ट लिया जा सकता है इसलिए
इसे मोनो प्रिन्टर भी कहते हैं। इसकी क्षमता को डी पी
आई (Dots Per Inch) में मापा जाता है।
(ii) डेजी व्हील प्रिन्टर (Daisy wheel Printer): यह भी कम्प्यूटर प्रिंटर जिसमें प्रिन्ट हैड की जगह डेजी व्हील होता है जो प्लास्टिक या धातु का बना होता है। व्हील के बाहरी छोर पर अक्षर बना होता है। एक अक्षर को प्रिन्ट करने के लिए डिस्क को घूमाना पड़ता है, जब तक पेपर तथा अक्षर सामने न आ जाये। तब हैमर व्हील पर चोट करता है तथा अक्षर रिबन को चोटकर कागज पर एक अक्षर प्रिन्ट करता है। इससे ग्राफ या चित्र प्रिन्ट नहीं किया जा सकता है। यह शोर करने वाला तथा धीमी छपाई करता है।
(b) नॉन इम्पैक्ट प्रिन्टर (Non Impact Printer): यह ध्वनि मुक्त प्रिन्टर है क्योंकि इसमें प्रिन्टिग हेड कागज पर चोट नहीं करता है। नॉन इम्पैक्ट प्रिन्टर भी कई प्रकार के होते हैं-
(i) इंकजेट प्रिन्टर (Inkjet Printer):
यह नॉन इन्पैक्ट करेक्टर प्रिन्टर है। यह इंकजेट तकनीक पर कार्य करता है। यह दो तरह के होते हैं-मोनो और रंगीन । इसमें स्याही के लिए कारिज (cartridge) लगाया जाता है। स्याही को जेट की सहायता से छिड़ककर कैरेक्टर तथा चित्र प्राप्त होता है। इसकी गुणवत्ता तथा स्पीड दोनों कम होती है, तथा इसमें प्रिन्टिंग खर्च भी ज्यादा आता है।
(ii) लेजर प्रिन्टर (Laser Printer):
यह तीव्र गति का पेज प्रिन्टर है। इसमें लेजर बीम की
सहायता से ड्रम पर आकृति बनाता है। लेजर (बीम) पर इंक डालने के फलस्वरूप विद्युत चार्ज हो जाता है। तब
इंक को टोनर में लुढ़काया जाता है, जिससे टोनर इंक के चार्ज भागों पर लग जाता है। इसे ताप तथा दवाब के संयोजन से कागज पर स्थानान्तरित कर दिया जाता है जिससे प्रिन्ट प्राप्त होता है। यह थर्मल तकनीक पर काम करता है। यह दो तरह के होते हैं मोनो और रंगीन । इसकी गुणवता और स्पीइ दोनों बाकी प्रिन्टरों की तुलना में काफी बेहतर होती है।
(iii) थर्मल प्रिन्टर Thermal Printer):
इसमें थर्मोक्रोमिक (Thermochromic) कागज का उपयोग किया जाता है। जब कागज थर्मल प्रिंट हेड से गुजरता है तो कागज के ऊपर स्थित लेप (coating) उस जगह काला हो जाता है जहाँ यह गर्म होता है तथा प्रिन्ट प्राप्त होता है। यह डॉट मैट्रिक्स प्रिन्टर की
तुलना में तीव्र तथा ध्वनि रहित होता है। इसमें प्रिन्ट की गुणवत्ता अच्छी होती है।
3. स्पीकर (Speaker):
यह भी एक आउटपुट डिवाइस है। जो अक्सर मनोरंजन के लिए उपयोग में आता है। यह ध्वनि में के रूप में आउटपुट देता है। इसके लिए सी पी यू (CPU) में साउन्ड कार्ड का होना आवश्यक है। इसका उपयोग प्रायः संगीत या किसी तरह की ध्वनि सुनने में होता है।
4. प्लॉटर (Plotter) :
यह एक आउटपुट डिवाइस है, जिसका उपयोग ग्राफ प्राप्त करने के लिए होता है। मुख्यतः इसका उपयोग इंजीनियर, चिकित्सक, वास्तुविद, सिटी प्लानर आदि
करते हैं। यह ग्राफ लिए रेखाचित्र जैसे आउटपुट प्रदान करता है।
5. स्क्रीन इमेज पोजेक्टर (Screen image Projector):
यह एक हार्डवेयर डिवाइस है
जो बडे सतह तथा पर्दे पर चित्रों को दिखाता है। सामान्यतः इसका उपयोग प्रस्तुतियों और बैठकों
(Presentation and Meetings) में किया जाता है, जो एक बड़ी छवि के रूप में दिखाया जाता है जिसे बड़े हॉल में बैठे हर कोई देख सके।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
आप नीचे कॉमेंट में अपना कोई भी प्रश्न पूछ सकते है